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Nitnama Hindi Ai
3 months ago

सरसा नदी को गुरु गोबिंद सिंह जी ने क्या श्राप दिया था?

“सरसा के पानी, ज़रा ठहर कर बहो, आज जुझारू गुजर रहा है…” जब आनंदपुर साहिब से चढ़ाई की ओर चलें, तो रोपड़ क्षेत्र में एक बरसाती नाला पड़ता है, जो सोलन की पहाड़ियों से निकलकर मालवा की ओर बढ़ता है। इसे सरसा नदी कहा जाता है। वास्तव में सरसा कोई बड़ा दरिया या स्थायी नदी नहीं थी, बल्कि केवल एक बरसाती नाला थी। अधिक गहराई में गए बिना आगे बढ़ें तो यहीं सरसा के तट पर गुरु साहिब का पूरा परिवार एक-दूसरे से बिछड़ गया—और ऐसा बिछोह हुआ कि फिर कभी मिलन न हो सका। कहा जाता है कि गुरु साहिब ने सरसा से कहा था कि अब तू कभी उफान पर नहीं आएगी। जो लोग सरसा के पास रहते हैं, वे जानते हैं कि आज सरसा की क्या हालत है—नरक जैसी परिस्थितियाँ बन चुकी हैं। नालागढ़, बद्दी और बरोतीवाला क्षेत्रों में लगे उद्योगों ने इसकी दशा और दिशा दोनों बिगाड़ दी हैं। इसी सरसा के किनारे एक ऐतिहासिक गुरु-घर भी स्थित है, जिसे गुरुद्वारा परिवार विछोड़ा साहिब कहा जाता है। पहले यह गुरुद्वारा सरसा के बिल्कुल किनारे था, लेकिन आज सरसा इससे काफी पीछे हटकर बहती है। वैसे यह भूमि अत्यंत रमणीय है। यह मालवा क्षेत्र में आती है, लेकिन यहाँ पुहाड़ी और दोआबी बोली का मिला-जुला प्रयोग होता है। मैंने लगभग पूरा भारत घूमकर देखा है, पर जो आनंद और आध्यात्मिक शांति तख़्त श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर मिलती है, वह संसार में कहीं और नहीं। इस पावन धरती के कण-कण से मेरे कलगीधर पातशाह की खुशबू आती है। दसवें पातशाह की पसंद वास्तव में बहुत ही विशिष्ट थी। इसी प्रकार पांवटा साहिब की धरती भी अत्यंत सुंदर और रमणीय है। — हरप्रीत कौर बल

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