Nitnama Nitnama
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Nitnama
3 months ago

मन तू जोति सरूपु है अपना मूलु पछाणु ॥
अर्थ: हे मन! तू परमात्मा की ज्योति का स्वरूप है। अपने वास्तविक मूल और दिव्य स्वरूप को पहचान।

स्रोत: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी: अंग 441

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