सिख इतिहास में “22 घाट के राजा” वे पहाड़ी राजा थे जो शिवालिक पहाड़ियों के क्षेत्र में शासन करते थे। ये सभी राजा गुरु गोबिंद सिंह जी के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हो गए थे। गुरु जी धर्म, न्याय और समानता का प्रचार कर रहे थे, जिससे आम लोग गुरु जी की ओर आकर्षित हो रहे थे। इन 22 राजाओं ने आपस में मिलकर गुरु जी का विरोध करने की योजना बनाई। उन्होंने कई बार मुग़ल सत्ता के साथ भी गठजोड़ किया ताकि गुरु जी को आनंदपुर साहिब से हटाया जा सके। राजाओं को लगता था कि गुरु जी की शक्ति से उनकी राजनीतिक हैसियत कम हो रही है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने सदैव धर्म और सत्य का मार्ग अपनाया। जब 22 घाट के राजाओं ने गुरु जी पर आक्रमण किया, तब गुरु जी के सिखों ने धर्म की रक्षा के लिए दृढ़ता से सामना किया। गुरु जी ने कभी भी अत्याचार का समर्थन नहीं किया और सदैव न्याय के लिए खड़े रहे। यह साखी हमें सिखाती है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले को कई बार बड़े विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन अंततः नैतिक विजय सत्य की ही होती है। गुरु गोबिंद सिंह जी की अडिगता और साहस ने सिख इतिहास में अमिट छाप छोड़ी ।
Please log in to comment.