Nitnama Nitnama
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Nitnama
3 months ago

अंतरि प्रेमु दुखु भयु भागै ॥
अर्थ: जिस व्यक्ति के भीतर परमात्मा के प्रति प्रेम बस जाता है, उसके दुख और भय दूर हो जाते हैं।

स्रोत: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी: अंग 112

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