आज गुरुद्वारा गुरु नानक सिख टेंपल में सिख संगत द्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन पर्व की खुशी में भव्य नगर कीर्तन सजाया गया। इस धार्मिक आयोजन ने संगत को गुरबाणी के मधुर स्वर, केसरिया निशान साहिबों और सेवा–सिमरन की आध्यात्मिक रौनक से सराबोर कर दिया। नगर कीर्तन की शुरुआत अरदास से हुई। पंज प्यारे सजीले बाने में आगे-आगे चलकर संगत की अगुवाई करते रहे। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन हज़ूरी में संगत ने “सतनाम वाहेगुरु” के जाप से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। मार्ग भर गुरबाणी कीर्तन, शब्द-कथा और जाप-सिमरन ने संगत के मन को विनम्रता और शांति से भर दिया। नगर कीर्तन के दौरान सेवा की एक विशेष झलक देखने को मिली। सेवेदारों ने सड़कों की सफाई करते हुए छोटे-बड़े सभी के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की। लंगर सेवा, मीठे पानी और प्रसाद के वितरण के माध्यम से “सरबत दा भला” का संदेश घर-घर तक पहुंचाया गया। बच्चे, युवा और बुज़ुर्ग—हर वर्ग की संगत ने निस्वार्थ सेवा कर गुरु घर की परंपरा को जीवंत किया। इस अवसर पर केसरिया झंडों से सजे वाहनों और सुंदर फूलों से सजी हुई हज़ूरी ने नगर कीर्तन को एक विशेष स्वरूप प्रदान किया। स्थानीय निवासियों ने भी श्रद्धा के साथ नगर कीर्तन का स्वागत किया और सिख परंपरा की शांतिपूर्ण व सेवामयी छवि की सराहना की। समापन के समय गुरुद्वारा साहिब में दीवान सजाया गया, जहाँ कथा-कीर्तन के माध्यम से गुरु नानक साहिब जी की शिक्षाओं—नाम जपना, किरत करना और वंड छकना—का संदेश दोहराया गया। संगत ने एक मन होकर अरदास की कि वाहेगुरु सभी पर कृपा करें और संसार में प्रेम, भाईचारे और शांति बनी रहे। संपादकीय टिप्पणी: बिनान लगूना में सजा यह नगर कीर्तन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और एकता का जीवंत प्रतीक है—जिसने फिलीपींस में बसने वाली सिख संगत की मजबूत आस्था और गुरमत मूल्यों को विश्व के सामने उजागर किया।
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