मासिया वह दिन होता है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता और अमावस्या की स्थिति होती है। भारतीय परंपराओं में इस दिन को कई धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है। लेकिन सिख धर्म में मासिया को किसी अंधविश्वास या विशेष कर्मकांड से नहीं जोड़ा गया है। सिख धर्म के अनुसार हर दिन परमात्मा के नाम का सिमरन करने और गुरबाणी के अनुसार जीवन जीने के लिए है। इसलिए मासिया का महत्व आध्यात्मिक चिंतन और आत्मिक सुधार में माना जाता है। मासिया के दिन गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, गुरबाणी पाठ और कथा का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु गुरुद्वारों में एकत्र होकर वाहेगुरु का सिमरन करते हैं और सेवा में भाग लेते हैं। कई लोग इस दिन लंगर सेवा करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता भी करते हैं। गुरबाणी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति किसी विशेष दिन या तिथि पर निर्भर नहीं होती। मनुष्य को हर समय परमात्मा का स्मरण करना चाहिए और अच्छे कर्म करने चाहिए। सिख धर्म में बाहरी रस्मों की अपेक्षा आंतरिक पवित्रता और सच्चे जीवन को अधिक महत्व दिया गया है। इसलिए मासिया का दिन आत्मिक चिंतन और गुरमत मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला अवसर बन जाता है।
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