धन्य गुरु हरगोबिंद साहिब महाराज जी के तीन विवाह हुए। उनका दूसरा आनंद कारज 8 वैशाख 1613 को माता नानकी जी के साथ हुआ। माता नानकी जी, बाबा बकाला नगर के निवासी बाबा हरिचंद जी और माता हरिदेई जी की सुपुत्री थीं। रिश्ता तय होने के कुछ समय बाद विवाह के लिए 8 वैशाख का दिन निश्चित किया गया। बाबा हरिचंद जी ने संदेश अमृतसर साहिब भेजा। माता गंगा जी, परिवार और सिख संगत बहुत प्रसन्न हुए और विवाह की तैयारियां शुरू हो गईं। बड़े सतिगुरुओं के परिवार — बेदी, तेहण, भल्ले, सोढ़ी तथा अन्य संबंधियों और प्रमुख गुरसिखों को निमंत्रण भेजा गया। सभी श्री अमृतसर साहिब एकत्र हुए। बारात की तैयारी हुई। छठे सतिगुरु महाराज ने पीले वस्त्र धारण किए, सुंदर पगड़ी बांधी और कलगी सजाई। श्री दरबार साहिब में मत्था टेककर बारात बकाला नगर के लिए रवाना हुई। बाबा बुड्ढा जी, भाई बिधी चंद जी, भाई गुरदास जी आदि गुरसिख साथ थे। जब बारात बकाला पहुंची, तो बाबा हरिचंद जी बड़े प्रेम से स्वागत करने आए। गुरु साहिब को सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाया गया। पूरी बारात का आदर-सत्कार किया गया, लंगर और जल दिया गया, घोड़ों और हाथियों की सेवा की गई। अगले दिन कीर्तन के बाद लावां (फेरे) संपन्न हुए। उस समय की परंपरा अनुसार बारात तीन दिन तक बकाला में रही और बाबा हरिचंद जी ने भरपूर सेवा की। चौथे दिन विदाई के समय बाबा हरिचंद जी ने विनम्रता से कहा — “महाराज, मुझसे कोई सेवा नहीं हुई। मेरी यह पुत्री आपके चरणों की सेवा के लिए प्रस्तुत है। हम भूल करने वाले हैं, आप अपनी कृपा बनाए रखें।” माता हरिदेई जी ने नानकी जी को समझाते हुए कहा — “बेटी, पति स्त्री के लिए परमात्मा समान होता है, पर तू तो बहुत भाग्यशाली है कि सच्चे पातशाह के चरणों में जा रही है। तन-मन से अपने पति गुरु की सेवा करना।” माता-पिता ने भावुक होकर विदाई दी। धीरे-धीरे बारात बकाला से अमृतसर साहिब पहुंची। यहां भी सबसे पहले दरबार साहिब में मत्था टेककर धन्यवाद की अरदास की गई। शाम को गुरु साहिब विवाह के वस्त्रों में ही तख्त साहिब पर विराजमान हुए और संगत को दर्शन दिए। मिठाइयां वितरित की गईं और धीरे-धीरे सभी बाराती अपने-अपने घर लौट गए। समय के साथ माता नानकी जी की पवित्र कोख से दो पुत्र उत्पन्न हुए — पहले बाबा अटल राय जी, जिन्होंने बचपन में ही शरीर त्याग दिया, और दूसरे नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी। धन्य गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज और माता नानकी जी के विवाह की सभी को लाख-लाख बधाइयां। नोट: कुछ विद्वान विवाह की तिथि 1 वैशाख या 13 वैशाख बताते हैं, परंतु अधिक प्रचलित और महान कोश के अनुसार तिथि 8 वैशाख विक्रमी संवत 1670 (ईस्वी 1613) है।
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