गुरुद्वारा श्री थड़्ढा साहिब जम्मू और कश्मीर के ज़िला बारामुला के गाँव सिंहपुरा में स्थित है। श्रीनगर में माँई भाग भट्टी की इच्छा पूरी करने के बाद, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी यहाँ पधारे। यहाँ एक वृद्ध मुस्लिम संत बहलौर शाह रहते थे। उन्होंने गुरु साहिब जी की अत्यंत श्रद्धा और प्रेम से सेवा की तथा विनती की कि आस-पास के क्षेत्रों में पानी की बहुत कमी है, क्योंकि यह स्थान पहाड़ी पर स्थित है। गुरु साहिब ने अपने पवित्र बरछे (भाले) से भूमि को स्पर्श किया और फरमाया — “यहाँ एक सुंदर कुआँ बनेगा। जितना पानी चाहिए, सदा के लिए उपयोग करो।” आज भी वहाँ एक पानी से भरा हुआ कुआँ मौजूद है। इस कुएँ के पानी को लोग बड़ी श्रद्धा और पवित्रता से प्रयोग करते हैं। इसके पश्चात गुरु साहिब ने बारामुला की भूमि को धन्य किया। लंबे समय तक गुरु साहिब वहीं ठहरे, संगत से विचार-विमर्श करते रहे और संगतें उनके दर्शन पाकर धन्य होती रहीं। जब गुरु साहिब आगे प्रस्थान कर गए, तो संगत ने उस स्थान पर थड़्ढा (चबूतरा) बनवाया जहाँ गुरु साहिब बैठा करते थे, और तभी से इस स्थान का नाम थड़्ढा साहिब पड़ा।
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