कहै नानक जिस नो आपि तुठा तिनि अमृत गुर ते पाया ॥੧੩॥अर्थ: नानक कहते हैं, जिस पर भगवान प्रसन्न होते हैं, वह गुरु के माध्यम से नाम-अमृत प्राप्त करता है।स्रोत: गुरु ग्रन्थ साहिब : अंग 918
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अंग: 582<br><span style="color:#a77d0f"><strong>वडहंसु महला ३ महला तीजा ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ प्रभु सचड़ा हरि सालाहीऐ कारजु सभु किछु करणै जोगु ॥ सा धन रंड...
अंग: 674<br><span style="color:#a77d0f"><strong>धनासिरी महला ५ ॥ अब हरि राखनहारु चितारिआ ॥ पतित पुनीत कीए खिन भीतरि सगला रोगु बिदारिआ ॥१॥ रहाउ ॥ गोसटि...
अंग: 602<br><span style="color:#a77d0f"><strong>सोरठि मः ३ दुतुके ॥ सतिगुर मिलिऐ उलटी भई भाई जीवत मरै ता बूझ पाइ ॥ सो गुरू सो सिखु है भाई जिसु जोती जो...
<span style="color:#a77d0f"><strong>तू आदि पुरुषु अपरंपरु करता ॥</strong></span><br><strong>अर्थ:</strong> हे प्रभु! आप आदि से हैं, अनंत हैं और सबके क...
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