दिसंबर महीने में बहुत अधिक ठंड पड़ती है, लेकिन इसी दिसंबर महीने में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और गुरु जी के परिवार का अत्यंत दुखद बिछोह हुआ था। 6 पोह की रात को आनंदपुर साहिब का किला छोड़ते समय श्री गुरु गोबिंद सिंह जी अपने परिवार और कुछ सिंहों की टुकड़ी के साथ चले थे। जब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी सरसा नदी के पास पहुँचे, तो इसकी जानकारी मुगलों को मिल गई। मुगलों ने गुरु साहिब और उनके परिवार पर हमला कर दिया। गुरु साहिब जी ने खालसा फौज को दो भागों में बाँट दिया—एक भाग मुगलों को रोकने के लिए और दूसरा सरसा नदी पार करने के लिए। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी अपने परिवार सहित सिंहों के साथ सरसा नदी पार कर रहे थे। उस समय सरसा नदी में बहुत तेज़ बाढ़ आई हुई थी। एक ओर मुगलों की फौज और दूसरी ओर नदी की बाढ़ ने पूरे परिवार को बिखेर दिया। सरसा नदी में आई बाढ़ के कारण श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का परिवार तीन भागों में बँट गया। गुरु साहिब जी और बड़े साहिबज़ादे—साहिबज़ादा बाबा अजीत सिंह, साहिबज़ादा बाबा जुझार सिंह—और 40 सिंह एक ओर रह गए। गुरु साहिब जी के छोटे साहिबज़ादे—साहिबज़ादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा बाबा फतेह सिंह—माता गुजरी जी के साथ नदी के दूसरे किनारे गुरु-घर के रसोइए गंगू ब्राह्मण के साथ मोरिंडा चले गए। और साहिबज़ादों की माता साहिब कौर जी तथा कुछ सिंह दिल्ली पहुँच गए। इस काली रात और सरसा नदी की बाढ़ ने पूरे परिवार को सदा के लिए अलग कर दिया, जो उसके बाद कभी एक-दूसरे से मिल नहीं सका। आज इस स्थान पर, सरसा नदी के किनारे, उस अविस्मरणीय बिछोह की स्मृति में गुरुद्वारा श्री परिवार विछोड़ा साहिब बना हुआ है।
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