गुर का सबदु रिदै धिआइ ॥अर्थ: गुरु के शब्द को अपने हृदय में धारण कर उसका ध्यान करो, क्योंकि यही आत्मिक जीवन का सही मार्ग है।स्रोत: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी: अंग 393
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अंग: 614<br><span style="color:#a77d0f"><strong>सोरठि महला ५ ॥ मिरतक कउ पाइओ तनि सासा बिछुरत आनि मिलाइआ ॥ पसू परेत मुगध भए स्रोते हरि नामा मुखि गाइआ ॥...
ਅੰਗ: 721<br><span style="color:#a77d0f"><strong>ਤਿਲੰਗ ਮਹਲਾ ੧ ਘਰੁ ੩ ੴਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਇਹੁ ਤਨੁ ਮਾਇਆ ਪਾਹਿਆ ਪਿਆਰੇ ਲੀਤੜਾ ਲਬਿ ਰੰਗਾਏ ॥ ਮੇਰੈ ਕੰਤ ਨ ਭਾਵੈ ਚੋਲੜਾ...
अंग: 692<br><span style="color:#a77d0f"><strong>रागु धनासरी बाणी भगत कबीर जी की ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ राम सिमरि राम सिमरि राम सिमरि भाई ॥ राम नाम सिमरन ब...
ਗੁਰੂ ਹਰਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੇ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦਿਹਾੜੈ ਦੀਆਂ ਸਰਬੱਤ ਸੰਗਤਾਂ ਨੂੰ ਲੱਖ ਲੱਖ ਮੁਬਾਰਕਾਂ ਹੋਵਣ ਜੀ ਸ੍ਰੀ ਹਰਿਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਧਿਆਈਐ; ਜਿਸ ਡਿਠੈ ਸਭਿ ਦੁਖ ਜਾਇ ॥ ਹਰ ਗੁਰਸਿੱਖ ਜਦੋਂ...
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सिख इतिहास असीम बलिदानों से भरा हुआ है। यह साखी भाई गुलाब सिंह, गाँव अकबरपुर खुडाल, तहसील बरेटा, ज़िला मानसा की है। आपका जन्म स्वर्णकार जाति में हुआ थ...
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