Nitnama Nitnama
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Nitnama
1 month ago

मन तू ज्योति स्वरूप है, अपना मूल पहचान।
अर्थ: हे मन! तू परमात्मा की ज्योति का स्वरूप है। अपने वास्तविक मूल को पहचान और माया-मोह से ऊपर उठ।

स्रोत: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी: अंग 441

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