सतिगुर पूरा जे मिलै पिआरे सो जन होत निहाला।
गुर की सेवा सो करे पिआरे जिस नो होइ दयाला।॥१॥
अर्थ: जिसे पूर्ण सतिगुरु मिल जाए, उसका जीवन निहाल हो जाता है। गुरु की सेवा वही करता है, जिस पर प्रभु की दया हो।
स्रोत: राग बिलावल, महला ५, अंग 819 (श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी)।
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