गुरुद्वारा फलाही साहिब गाँव दुलैया के बाहर आलमगीर गाँव से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गुरुद्वारा साहिब सुन्दर पेड़ों के क्षेत्र से घिरा हुआ है। दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी 1705 ई. में झाड़ साहिब, माछीवाड़ा, लल कलां, रामपुर, कनेच और आलमगीर आदि गाँवों से होते हुए गाँव दुलैया पहुँचे। उन्होंने एक फलाही (बरगद जैसे) पेड़ से अपना घोड़ा बाँधा और एक रात यहाँ विश्राम किया। गुरु जी ने रायपुर किले के दो सिख सरदारों, भाई जट्टू और भाई सवाई को भाई मान सिंह के माध्यम से यहाँ बुलाने का संदेश भेजा, पर वे नहीं आए। इसके बाद गुरु जी यहाँ से चलकर गाँव रत्ना (टाहली साहिब) चले गए। जब रायपुर की श्रद्धालु माईयों को यह पता चला कि उन्होंने गुरु जी के आदेश की अवहेलना कर दी है, तो वे पश्चाताप करने और क्षमा माँगने के लिए दुशाला और प्रसाद लेकर गाँव रत्ना पहुँच गईं। गुरु जी उनकी श्रद्धा से प्रसन्न हुए और आशीर्वाद दिया कि तुम लोग राज्य करोगे और तुम्हारी सरदारियाँ कायम होंगी।
Please log in to comment.