दरबार खालसा सिख इतिहास का एक प्रमुख आयोजन है, जिसे दशहरे के दिन श्री अमृतसर साहिब स्थित अकाल तख्त साहिब पर मनाया जाता था। इसकी शुरुआत दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी। इस दिन खालसा पंथ के सभी अहम मसले, निर्णय, रणनीतियाँ और धार्मिक-सामाजिक योजनाएँ सामूहिक रूप से तय की जाती थीं। इसे खालसा की सर्वोच्च परिषद कहा जाता था, जहाँ संपूर्ण पंथ की दिशा और नीति निश्चित होती थी। आज भी दरबार खालसा हमें अपनी एकता, शक्ति और गौरवशाली विरासत की याद दिलाता है।
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