Nitnama Nitnama
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Nitnama
5 months ago

सोचै सोचि न होवई जे सोचि लाख वार ॥
अर्थ: केवल सोचते रहने से कुछ नहीं होता; लाख बार भी सोच लो, मन का मैल नहीं धुलता।

स्रोत: जपुजी साहिब (पौड़ी 1), गुरु नानक देव जी, अंग 1

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