पोह का महीना अपने भीतर इतना भारी दर्द समेटे हुए है कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इतिहास पढ़ो तो आँसू खुद-ही बह निकलेंगे, रूह काँप उठेगी। कैसे इतने निर्दयी पापी हो सकते थे जिन्होंने छोटे साहिबज़ादों को ज़िंदा ही दीवार में चुनवा दिया? लाखों तरह की यातनाएँ दी गईं, माता गुजरी जी और छोटे साहिबज़ादों को ठंडे बुर्ज में बंद कर दिया गया। भाई मोती राम मेहरा जी, जिन्होंने छोटे साहिबज़ादों को गरम दूध पिलाकर उनकी सेवा की, उन्हें, उनके पूरे परिवार को और उनके छोटे बच्चे तक को कोल्हू की चक्की में जिंदा पीसकर निर्दयता से शहीद कर दिया गया। पोह खुशियों का महीना नहीं—यह हर पल, हर सेकंड शहादतों से भरा महीना है। हर साँस के साथ इन बलिदानों को याद रखो। शहीदों को लाख-लाख सलाम। 💔🙏 ये दिन मनोरंजन के लिए नहीं होते। अपनी आँखें बंद करो और उस दर्द को महसूस करो। ये दिन आत्मा को जगाने वाले, सच्चाई से जुड़ने वाले दिन हैं। इतिहास पढ़ो और सोचो— हमें इन अनमोल बलिदानों से मिली सीख को कभी नहीं भूलना चाहिए। ये दिन सिर्फ़ श्रद्धांजलि देने के नहीं—सीखने के दिन हैं। सही मार्ग पर चलते हुए उस विरासत को मान देना है जिसके कारण हम आज ज़िंदा हैं। 💔🙏
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