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भाई जुगराज सिंह तूफ़ान की शहादत

भाई जुगराज सिंह, जो तूफान सिंह के नाम से भी जाने जाते हैं, 1971 में पंजाब के गांव चीमा खुड्डी में जन्मे थे। उनके पिता का नाम सरदार प्रीतम सिंह और माता का नाम सरदारनी गुरबचन कौर था। वे अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और उनकी पांच बहनें थीं। 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लूस्टार ने जुगराज सिंह को गहराई से प्रभावित किया, जिसके बाद वे सिख अधिकारों की रक्षा के संघर्ष में शामिल हो गए। उन्होंने खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) में शामिल होकर अपनी गतिविधियां शुरू कीं। उन्होंने अपने क्षेत्र में गैरकानूनी गतिविधियों और अपराधी गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करके लोगों को सुरक्षा प्रदान की। भाई जुगराज सिंह ने 8 अप्रैल 1990 को गुरदासपुर जिले के मारी बुच्चियां गांव में हुए एक मुकाबले के दौरान शहादत प्राप्त की। उनकी शहादत के बाद लगभग 4 लाख लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता और लोगों के सम्मान को दर्शाता है। 2017 में उनकी जिंदगी पर आधारित एक फिल्म “तूफान सिंह” रिलीज हुई, जिसे भारतीय सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं दी। भाई जुगराज सिंह तूफान की जिंदगी की कई कहानियों में से एक जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित है, वह है गांव भिखीविंड के गोंडा गिरोह के खिलाफ उनकी मुहिम। 1980 और 90 के दशक में पंजाब में कानून व्यवस्था कमजोर हो चुकी थी। कई जगहों पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद अपराधी गिरोह लोगों को डराते-धमकाते थे। भिखीविंड क्षेत्र में एक गोंडा गिरोह लोगों से जबरन वसूली करता, महिलाओं के साथ बदसलूकी करता और उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लेता था। जब भाई तूफान सिंह को यह पता चला, तो उन्होंने कहा: “हमारे गुरुओं ने हमें कभी भी बेगुनाह पर जुल्म सहने के लिए नहीं कहा। अगर जुल्म देखो, तो उसके खिलाफ खड़े हो।” उन्होंने चुप रहने के बजाय अन्य सिंहों के साथ मिलकर गिरोह की पहचान की, उनकी गतिविधियों पर नजर रखी और एक रात उनके ठिकाने पर छापा मारा। यह कोई साधारण कार्रवाई नहीं थी। गिरोह पूरी तैयारी में था और वहां गोलीबारी हुई। कई घंटों तक मुकाबला चलता रहा। आखिरकार भाई तूफान सिंह और उनकी टीम ने गिरोह के मुख्य सदस्यों को खत्म कर दिया और बाकी को भागने पर मजबूर कर दिया। इस कार्रवाई के बाद भिखीविंड और आसपास के इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली। जहां कानून असफल हो गया था, वहां भाई तूफान सिंह ने लोगों को न्याय दिलाया। लोग कहते हैं: वह न पुलिस थे, न जज — लेकिन जब “तूफान सिंह” आ जाते थे, तो न्याय मिल जाता था।

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